
- *चीख-पुकार के बीच थम गया 6 जिंदगियों का जीवन, पुलिया निर्माण बना मौत का रास्ता, राजस्थान में भीषण सड़क हादसा*
उदयपुर -राजस्थान में उदयपुर जिले के गोगुंदा इलाके में शुक्रवार को ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल दहला दिया। दोपहर करीब 12:30 बजे, तेज़ रफ्तार ट्रेलर ने सवारियों से भरे टैंपो को जोरदार टक्कर मार दी। इस भयावह दुर्घटना में 6 लोगों की जान चली गई, जबकि 3 गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।
*चीख-पुकार से गूंजा हादसे का मंजर*
9 लोगों से भरा टैंपो हंसी-खुशी अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था। अचानक, सामने से आ रहे अनियंत्रित ट्रेलर ने टैंपो को टक्कर मार दी।टक्कर इतनी भयानक थी कि 4 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।2 अन्य घायल, अस्पताल ले जाते समय ज़िंदगी की जंग हार गए।
*ब्रेक फेल, लापरवाही और जानलेवा हादसा*
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ट्रेलर के ब्रेक फेल हो गए थे।
हाईवे पर पुलिया निर्माण का काम चल रहा था, जिससे यातायात एकतरफा कर दिया गया था।प्रशासन की लापरवाही और यातायात अव्यवस्था भी इस त्रासदी का बड़ा कारण मानी जा रही है।
*हादसे के बाद अफरा-तफरी और फरार ट्रेलर चालक*
हादसे के तुरंत बाद ट्रेलर चालक मौके से भाग निकला।मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने घायलों को निकालने में मदद की।पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
*मानवीय त्रासदीः चिताएं उठेंगी छह घरों से*
इस हादसे में जान गंवाने वाले परिवारों के आंसुओं की सिसकियां हर किसी को भीतर तक झकझोर गईं। एक पल की लापरवाही ने छह जिंदगियों को बुझा दिया और तीन घायलों को अस्पताल के बिस्तर पर लड़ाई लड़ने के लिए छोड़ दिया।
*क्या बोले पुलिस अधिकारी?*
एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने बताया कि हादसे की जांच शुरू कर दी गई है।ट्रेलर चालक की तलाश जारी है।हादसे के पीछे ब्रेक फेल और पुलिया निर्माण बड़ी वजह मानी जा रही है।
*लापरवाही की कीमत: सवालों के घेरे में प्रशासन* घटनास्थल से मिले तथ्यों के अनुसार, हाईवे प्रशासन की लापरवाही सवालों के घेरे में है। इस हादसे ने एक बार फिर दिखाया कि सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता की कमी किस तरह जिंदगियों को बर्बाद कर सकती है।
*अब सवाल यह है कि जिम्मेदार कब जागेंगे?*
3 महीने से पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा था।यातायात को व्यवस्थित करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए।क्या इन छह जिंदगियों को बचाया जा सकता था, अगर सुरक्षा प्रबं
ध बेहतर होते?


